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पीएम मोदी के गोद लिये गाँव में रोटी को तरसे लोग,खबर छापी तो पत्रकार पर हो गई FIR
लखनऊ:– मोदी सरकार हो या योगी सरकार दोनों ही का लक्ष्य एक ही हैं कि जो भी उनके खिलाफ बोलेगा
उसको सजा जरूर मिलेगी चाहे वह गरीब जनता के सवालों को क्यों न उठा रहा हो यूपी में सरकार की
सच्चाई को उजागर करने बाले अनेकों पत्रकारों पर पहले भी मुकद्दमा कायम हो चुके हैं। इसी क्रम में दिल्ली
की एक वरिष्ठ महिला पत्रकार पर FIR दर्ज हो चुकी हैं। उस पत्रकार का कसूर सिर्फ इतना था
कि उसने प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के डोमरी गाँव की खबर प्रकाशित की जिसे प्रधानमंत्री
मोदी ने गोद लिया हैं। वेबसाइट ‘स्क्रोल’ की संपादक सुप्रिया शर्मा ने खबर लिखी थी जिसका शीर्षक था-
”वाराणसी के जिस गांव को पीएम मोदी ने गोद लिया था वहां के लोग लॉकडाउन में भूखे.”
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पत्रकार सुप्रिया शर्मा पर किसने की FIR
वेबसाइट ‘स्क्रोल’ की संपादक सुप्रिया शर्मा पर उसी महिला ने मुकद्दमा दर्ज किया हैं जिसकी खबर उसने
अपनी वेबसाइट पर लिखी थी। इस मामले में वेबसाइट ‘स्क्रोल’ की तरफ से भी बयान आया हैं कि हमने
जो भी खबर प्रकाशित की हैं वह बिल्कुल सही हैं । अब सोचने बाली बात हैं कि जब सुप्रिया शर्मा को उस
महिला ने अपनी आप बीती सुनाई तो उसे वेबसाइट पर प्रकाशित किया लेकिन खबर प्रकाशित होने के
बाद उस महिला पर किसी ने दवाब तो नहीं बनाया जिससे उस महिला ने पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज कराया हो।
पत्रकार पर FIR पुलिस ने कहा
पुलिस के अनुसार सुप्रिया शर्मा ने कोविड-19 लॉकडाउन के असर पर एक खबर के लिए माला देवी का
इंटरव्यू लिया था। खबर में कहा गया कि माला देवी ने बताया कि वह एक घरेलू कामगार हैं और उनके
पास राशन कार्ड न होने की वजह से लॉकडाउन के दौरान उनको राशन की समस्या उत्पन्न हुई।
पुलिस ने कहा है कि एफआईआर में माला देवी ने आरोप लगाया है कि सुप्रिया शर्मा ने उनके
बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है। वह वह घरेलू कामगार नहीं हैं, बल्कि वह आउटसोर्सिंग के
माध्यम से वाराणसी नगरपालिका में स्वच्छता कार्यकर्ता के रूप में काम करती थीं
और लॉकडाउन के दौरान उनको या उनके परिवार को कोई भी समस्या नहीं हुई है।
पत्रकार सुप्रिया शर्मा पर माला देवी का आरोप
प्राथमिकी में माला देवी ने आरोप लगाया है कि सुप्रिया ने लॉकडाउन के दौरान उनके और
उनके बच्चों के भूखे रहने की बात कहकर उनकी गरीबी और जाति का मजाक उड़ाया है।
रामनगर पुलिस ने इस मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण)
अधिनियम, आईपीसी की धारा 501 और 269 के तहत केस दर्ज किया है।
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